मायाध्याक्षेण प्रकृतिः
सूयते स-चराचरम्
हेतुनानेन कौन्तेय
जगद् विपरीवर्तते
"भौतिक प्रकृति की सभी ऊर्जाओं में अंतिम अधीक्षक के रूप में सर्वोच्च प्रभु का हाथ है। केवल इस सर्वोच्च कारण के कारण ही, भौतिक प्रकृति की गतिविधियाँ नियोजित और व्यवस्थित दिखाई देती हैं, और सभी चीजें नियमित रूप से विकसित होती हैं। "
