मांडव्य मुनि एक महान ऋषि थे (देखें. भाग. 1.13.1), और विदुर पूर्व में नियंत्रक यमराज थे, जो मृत्यु के बाद जीवित संस्थाओं का कार्यभार संभालते हैं। जन्म, पालन और मृत्यु भौतिक संसार के भीतर रहने वाली जीवित संस्थाओं की तीन सशर्त अवस्थाएँ हैं। मृत्यु के बाद नियुक्त नियंत्रक के रूप में, यमराज ने एक बार माँडव्य मुनि को उनकी बचपन की छल-कपट के लिए आजमाया और उन्हें भाला से छेदने का आदेश दिया। यमराज द्वारा उन्हें अनुचित सजा देने पर उन पर क्रोधित होकर माँडव्य ने उन्हें एक शूद्र (کم فہم مزدور طبقہ کا فرد) बनने का श्राप दिया। इस प्रकार यमराज ने विचित्रवीर्य के भाई व्यासदेव के वीर्य से विचित्रवीर्य की रखी हुई पत्नी के गर्भ में जन्म लिया। व्यासदेव महान ऋषि पराशर द्वारा सत्यवती के पुत्र हैं, और विचित्रवीर्य उसी सत्यवती के पुत्र हैं जो महान राजा शांतनु द्वारा, जो भीष्मदेव के पिता हैं। विदुर के इस रहस्यमय इतिहास को मैत्रेय मुनि जानते थे क्योंकि वे व्यासदेव के समकालीन मित्र थे। रखी हुई पत्नी के गर्भ से जन्म लेने के बावजूद, क्योंकि उनका अन्यथा उच्च वंश और महान संबंध था, उन्हें भगवान के महान भक्त बनने की उच्चतम प्रतिभा विरासत में मिली। ऐसे महान परिवार में जन्म लेना भक्ति जीवन प्राप्त करने के लिए एक लाभ माना जाता है। विदुर को यह मौका उनकी पिछली महानता के कारण मिला था।
