नैतच्चित्रं त्वयि क्षत्तर्बादरायणवीर्यजे ।
गृहीतोऽनन्यभावेन यत्त्वया हरिरीश्वर: ॥ १९ ॥
अनुवाद
हे विदुर, यह जरा भी अचंभा की बात नहीं है कि आपने इस प्रकार अनन्य भाव से भगवान को स्वीकार कर लिया है, क्योंकि आप व्यासदेव के वीर्य से उत्पन्न हुए हैं।
O Vidura, it is not at all surprising that you have accepted the Lord in this exclusive devotion, since you are born of the semen of Vyasa.
तात्पर्य
विदुर के जन्म के संबंध में महान वंश और कुलीन जन्म के मूल्य का यहाँ मूल्यांकन किया गया है। एक नर की संस्कृति की शुरुआत तब होती है जब पिता अपने वीर्य को माँ के गर्भ में स्थापित करता है। उसके कर्म के आधार पर एक जीव को एक विशेष पिता के वीर्य में रखा जाता है और क्योंकि विदुर एक साधारण जीव नहीं थे इसीलिए उन्हें व्यास के वीर्य से जन्म लेने का मौका दिया गया। एक नर का जन्म एक महान विज्ञान है और इसलिए वैदिक संस्कार के अनुसार गर्भाधान-संस्कार के अनुसार निषेचन के कार्य में सुधार करना अच्छी जनसंख्या उत्पन्न करने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। समस्या जनसंख्या विकास को रोकने में नहीं है बल्कि विदुर, व्यास और मैत्रेय के स्तर पर अच्छी जनसंख्या उत्पन्न करने की है। यदि बच्चे अपने जन्म के संबंध में सभी सावधानियों के साथ नर रूप में पैदा होते हैं तो जनसंख्या विकास को रोकने की कोई आवश्यकता नहीं है। तथाकथित जन्म नियंत्रण न केवल दुष्ट है बल्कि बेकार भी है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥