श्री शुक उवाच
स एवं भगवान् पृष्ट: क्षत्त्रा कौषारवो मुनि: ।
पुंसां नि:श्रेयसार्थेन तमाह बहुमानयन् ॥ १७ ॥
अनुवाद
शुकदेव गोस्वामी ने कहा: महान ऋषि मैत्रेय मुनि ने विदुर का अत्यधिक सम्मान करने के बाद, सभी लोगों के परम कल्याण के लिए विदुर के अनुरोध पर बोलना शुरू किया।
Sukadeva Goswami said: After paying great respects to Vidura, at Vidura's request, the great sage Maitreya spoke for the greatest welfare of all people.
तात्पर्य
यहाँ पर महान ऋषि मैत्रेय मुनि को भगवान इसलिए कहा गया है क्योंकि वो सीखने और अनुभव में सभी साधारण इंसानों से श्रेष्ठ थे। इसलिए दुनिया के लिए सबसे बड़ी कल्याणकारी सेवा के उनके चुनाव को विश्वसनीय माना जाता है। पूरे मानव समाज के लिए समावेशी कल्याणकारी सेवा प्रभु की भक्ति है और, विदुर के अनुरोधानुसार ऋषि ने उसी का बहुत ही उचित वर्णन किया है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥