तदस्य कौषारव शर्मदातु-
र्हरे: कथामेव कथासु सारम् ।
उद्धृत्य पुष्पेभ्य इवार्तबन्धो
शिवाय न: कीर्तय तीर्थकीर्ते: ॥ १५ ॥
अनुवाद
हे मैत्रेय, हे दुखियों के मित्र, केवल परम प्रभु की महिमा ही सारे संसार के लोगों का कल्याण करने वाली है। इसलिए जिस तरह मधुमक्खियाँ फूलों से मधु एकत्र करती हैं, उसी प्रकार कृपया सभी कथाओं का सार—भगवान की कथा—वर्णन करें।
O Maitreya, O friend of the suffering, the glory of the one Supreme Lord is beneficial to the people of the whole world. Therefore, just as bees collect honey from flowers, please narrate the essence of all stories—the story of Krishna.
तात्पर्य
भौतिक प्रकृति के विभिन्न प्रकार के जीवों के लिए अनेक विषय होते हैं, लेकिन महत्वपूर्ण विषय वे हैं जो परम प्रभु से संबंधित हैं। दुर्भाग्य से, भौतिक रूप से प्रभावित बद्ध आत्माएँ सभी कम या ज्यादा परमेश्वर के विषयों के प्रति विमुख हैं क्योंकि उनमें से कुछ ईश्वर के अस्तित्व में विश्वास नहीं करते हैं और कुछ केवल भगवान् के अवैयक्तिक रूप की पूजा में विश्वास करते हैं। दोनों ही मामलों में उनके लिए ईश्वर के बारे में कहने के लिए कुछ भी नहीं है। नास्तिक और अवैयक्तिकवादी दोनों ही सभी विषयों के सार को नकारते हैं; इसलिए, वे विभिन्न तरीकों से सापेक्षता के विषयों में संलग्न होते हैं, या तो इंद्रिय तृप्ति में या मानसिक अटकलों में। विदुर जैसे शुद्ध भक्तों के लिए, मुंडन और मानसिक सट्टेबाज़ दोनों के विषय सभी प्रकार से बेकार हैं। इसलिए विदुर ने मैत्रेय से केवल सार, कृष्ण की बात और कुछ नहीं बताने का अनुरोध किया।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥