श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 4: विदुर का मैत्रेय के पास जाना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  3.4.8 
वाम ऊरावधिश्रित्य दक्षिणाङ्‌घ्रि सरोरुहम् ।
अपाश्रितार्भकाश्वत्थमकृशं त्यक्तपिप्पलम् ॥ ८ ॥
 
 
अनुवाद
भगवान अपनी दाहिनी कमलपाद को अपनी बाईं जंघा पर रख कर एक नन्हें बरगद वृक्ष के आधार पर सुस्ताते हुए बैठे हुए थे। यद्यपि, उन्होंने सभी घरेलू सुखोपभोगों का त्याग कर दिया था फिर भी वे उस अवस्था में पूर्णता प्रसन्नचित दिखाई पड़ रहे थे।
 
भगवान अपनी दाहिनी कमलपाद को अपनी बाईं जंघा पर रख कर एक नन्हें बरगद वृक्ष के आधार पर सुस्ताते हुए बैठे हुए थे। यद्यपि, उन्होंने सभी घरेलू सुखोपभोगों का त्याग कर दिया था फिर भी वे उस अवस्था में पूर्णता प्रसन्नचित दिखाई पड़ रहे थे।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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