| श्रीमद् भागवतम » स्कन्ध 3: यथास्थिति » अध्याय 4: विदुर का मैत्रेय के पास जाना » श्लोक 35 |
|
| | | | श्लोक 3.4.35  | आत्मानं च कुरुश्रेष्ठ कृष्णेन मनसेक्षितम् ।
ध्यायन् गते भागवते रुरोद प्रेमविह्वल: ॥ ३५ ॥ | | | | | | अनुवाद | | यह समझते हुए कि (संसार का त्याग करते समय) भगवान् कृष्ण ने उन्हें याद किया था, विदुर प्रेम रस से अभिभूत होकर ऊंचे स्वर से विलाप करने लगे। | | | | यह समझते हुए कि (संसार का त्याग करते समय) भगवान् कृष्ण ने उन्हें याद किया था, विदुर प्रेम रस से अभिभूत होकर ऊंचे स्वर से विलाप करने लगे। | | ✨ ai-generated | | |
|
|