श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 4: विदुर का मैत्रेय के पास जाना  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  3.4.33 
विदुरोऽप्युद्धवाच्छ्रुत्वा कृष्णस्य परमात्मन: ।
क्रीडयोपात्तदेहस्य कर्माणि श्लाघितानि च ॥ ३३ ॥
 
 
अनुवाद
महर्षिगण जिन विषयों को बड़ी लगन से जानना चाहते हैं, उन्हीं विषयों में से एक है मर्त्यलोक में परमात्मा, भगवान् कृष्ण का आविर्भाव और तिरोभाव। विदुर ने भी उद्धव से यह सुना।
 
महर्षिगण जिन विषयों को बड़ी लगन से जानना चाहते हैं, उन्हीं विषयों में से एक है मर्त्यलोक में परमात्मा, भगवान् कृष्ण का आविर्भाव और तिरोभाव। विदुर ने भी उद्धव से यह सुना।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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