|
| |
| |
श्लोक 3.4.32  |
एवं त्रिलोकगुरुणा सन्दिष्ट: शब्दयोनिना ।
बदर्याश्रममासाद्य हरिमीजे समाधिना ॥ ३२ ॥ |
| |
| |
| अनुवाद |
| श्री शुकदेव गोस्वामी ने राजा को बताया कि पूर्ण पुरूषोत्तम भगवान की जो समस्त वैदिक ज्ञान के स्रोत और तीनों लोकों के गुरु हैं, ऐसी शिक्षा पाकर उद्धव बदरिकाश्रम तीर्थस्थल पहुंचे और वहाँ परमात्मा को संतुष्ट करने के लिए समाधि में लीन हो गए। |
| |
| श्री शुकदेव गोस्वामी ने राजा को बताया कि पूर्ण पुरूषोत्तम भगवान की जो समस्त वैदिक ज्ञान के स्रोत और तीनों लोकों के गुरु हैं, ऐसी शिक्षा पाकर उद्धव बदरिकाश्रम तीर्थस्थल पहुंचे और वहाँ परमात्मा को संतुष्ट करने के लिए समाधि में लीन हो गए। |
| ✨ ai-generated |
| |
|