श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 4: विदुर का मैत्रेय के पास जाना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  3.4.22 
यत्र नारायणो देवो नरश्च भगवानृषि: ।
मृदु तीव्रं तपो दीर्घं तेपाते लोकभावनौ ॥ २२ ॥
 
 
अनुवाद
उसी बदरिकाश्रम में नर और नारायण ऋषियों के रोप में भगवान श्री हरि अनादिकाल से ही सभी जीवों के कल्याण के लिए महान तपस्या कर रहे हैं।
 
उसी बदरिकाश्रम में नर और नारायण ऋषियों के रोप में भगवान श्री हरि अनादिकाल से ही सभी जीवों के कल्याण के लिए महान तपस्या कर रहे हैं।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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