क्योंकि सभी महान संत और भक्त अपनी सारी ऊर्जा और अपनी सभी गतिविधियों को भगवान के चरण कमलों की सेवा में लगाते हैं, इसलिए उनके चरण कमलों के पैर के अंगूठे में कुछ आध्यात्मिक आनंद होता होगा। भगवान अपने पैर के अंगूठे को उस अमृत का स्वाद लेने के लिए चाटते हैं जिसकी भक्तों को हमेशा तमन्ना रहती है। कभी-कभी सर्वोच्च भगवान स्वयं अपने आप में कितना आध्यात्मिक आनंद है, यह सोचते हैं और अपनी शक्ति का स्वाद लेने के लिए कभी-कभी वे अपने आप को चखने की मुद्रा में ले लेते हैं। भगवान चैतन्य स्वयं कृष्ण हैं, पर वे एक भक्त के रूप में प्रकट होते हैं ताकि अपने आप में विद्यमान आध्यात्मिक आनंद का स्वाद ले सकें जिसे भक्तों में श्रेष्ठतम श्रीमती राधारानी चखती हैं।
