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bhagavat 3.33.32: हे विदुर, उनके शरीर के तत्व पानी में मिलकर बहने लगे हैं, जो सभी नदियों में सबसे पवित्र है। जो भी उस नदी में स्नान करता है, वह सिद्धि प्राप्त करता है। इसलिए, जो लोग सिद्धि पाना चाहते हैं, वे उसमें स्नान करते हैं।   |   bhagavat अध्याय 3.33: कपिल के कार्यकलाप   ।   bhagavat स्कन्ध 3: यथास्थिति   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 33: कपिल के कार्यकलाप  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  3.33.32 
तस्यास्तद्योगविधुतमार्त्यं मर्त्यमभूत्सरित् ।
स्रोतसां प्रवरा सौम्य सिद्धिदा सिद्धसेविता ॥ ३२ ॥
 
 
अनुवाद
हे विदुर, उनके शरीर के तत्व पानी में मिलकर बहने लगे हैं, जो सभी नदियों में सबसे पवित्र है। जो भी उस नदी में स्नान करता है, वह सिद्धि प्राप्त करता है। इसलिए, जो लोग सिद्धि पाना चाहते हैं, वे उसमें स्नान करते हैं।
 
O Vidura, the elements of his body melted and became water and now flow as the most sacred of all rivers. Whoever bathes in this river attains siddhi (supernatural powers), so those desirous of attaining siddhi bathe in it.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)