यहाँ वह उदाहरण दिया गया है कि देवहूति बिल्कुल उस गाय जैसी हो गईं जो अपना बछड़ा खो देती है। बछड़े के बिना रह गई गाय दिन-रात रोती है। इसी तरह देवहूति दुखी थीं और हमेशा दुख जताती थीं और अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से विनती करती थीं, “मेरे बेटे को घर ले आओ ताकि मैं जीवित रह सकूँ। वरना मैं मर जाऊँगी।” भगवान के लिए ये गहन प्रेम, हालाँकि बेटे के प्रति प्रेम के रूप में दिखा, आध्यात्मिक रूप से लाभकारी है। भौतिक बेटे के लिए लगाव आपको भौतिक जीवन में रहने की बाध्यता देता है, लेकिन वही लगाव जब भगवान के लिए होता है, तो आपको भगवान के संग में आध्यात्मिक दुनिया में ले जाता है।
हर स्त्री देवहूति जितनी ही योग्य हो सकती है और फिर सर्वोच्च भगवान को अपने बेटे के रूप में पा सकती है। अगर भगवान देवहूति के बेटे बनकर आ सकते हैं तो वो किसी भी स्त्री के बेटे बनकर आ सकते हैं बशर्ते वो स्त्री योग्य हो। अगर आपको भगवान को बेटे के रूप में प्राप्त करने हों तो इसका लाभ यह है कि आपको इस दुनिया में एक अच्छा बेटा पालने को मिलेगा और साथ ही आप आध्यात्मिक दुनिया में जाने के लिए प्रमोशन पाएँगे जहाँ आप भगवान से आमने-सामने मिल पाएंगे।
