इस श्लोक में भगवान के विशाल शरीर की प्रकृति को भी समझाया गया है। वह शरीर अलौकिक है, पदार्थ से अछूता है। चूंकि भौतिक प्रकटीकरण उनके शरीर से हुआ है, इस प्रकार उनका शरीर भौतिक सृष्टि से पहले मौजूद था। निष्कर्ष यह है कि विष्णु का अलौकिक शरीर भौतिक तत्वों से नहीं बना है। विष्णु का शरीर अन्य सभी जीवों के साथ-साथ भौतिक प्रकृति का भी स्रोत है, जिसे उस सर्वोच्च भगवान की ऊर्जा भी माना जाता है। देवहूति ने कहा, "तुम भौतिक अभिव्यक्ति और सभी सृजित ऊर्जा की पृष्ठभूमि हो; इसलिए सांख्य दर्शन की प्रणाली की व्याख्या करके मुझे माया के चंगुल से मुक्त करना तुम्हारे लिए कोई आश्चर्य की बात नहीं है। लेकिन तुमका मेरे पेट से जन्म लेना निश्चित रूप से अद्भुत है क्योंकि यद्यपि तुम सभी सृजन के स्रोत हो, फिर भी तुमने मेरे बच्चे के रूप में जन्म लिया है। वह सबसे अद्भुत है। तुम्हारा शरीर पूरे ब्रह्मांड का स्रोत है, और फिर भी तुम अपना शरीर मेरे जैसे एक साधारण महिला के पेट में डालते हो। मेरे लिए, वह सबसे आश्चर्यजनक बात है।"
