vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्रीमद् भागवतम
»
स्कन्ध 3: यथास्थिति
»
अध्याय 32: कर्म-बन्धन
»
श्लोक 43
श्लोक
3.32.43
य इदं शृणुयादम्ब श्रद्धया पुरुष: सकृत् ।
यो वाभिधत्ते मच्चित्त: स ह्येति पदवीं च मे ॥ ४३ ॥
अनुवाद
जो कोई एक बार श्रद्धा और प्यार से मेरा ध्यान करता है, मेरे बारे में सुनता और मेरा कीर्तन करता है, वह निश्चित रूप से भगवान के धाम को वापस जाता है।
Anyone who meditates on me, listens to me and sings my praises with faith and devotion will certainly return to the abode of God.
इस प्रकार श्रीमद् भागवतम के स्कन्ध तीन के अंतर्गत बत्तीसवाँ अध्याय समाप्त होता है ।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×