कटुतीक्ष्णोष्णलवणरूक्षाम्लादिभिरुल्बणै: ।
मातृभुक्तैरुपस्पृष्ट: सर्वाङ्गोत्थितवेदन: ॥ ७ ॥
अनुवाद
माता द्वारा खट्टे, नमकीन या कड़वे भोजन का सेवन करने से शिशु के शरीर में निरंतर पीड़ा रहती है, जो अक्सर असहनीय होती है।
Due to bitter, spicy, excessively salty or sour food consumed by the mother, there is constant pain in the body of the child, which is often unbearable.
तात्पर्य
माँ के गर्भ में बच्चे की शारीरिक स्थिति का कोई भी वर्णन हमारी समझ से परे है। ऐसी स्थिति में रहना बहुत कठिन है, लेकिन तब भी बच्चे को रहना पड़ता है। क्योंकि उसकी चेतना का विशेष रूप से विकास नहीं हुआ होता, इसलिए बच्चा इसे सहन कर पाता है, नहीं तो वह मर जाता। यही माया का वरदान है, जो दुखी शरीर को ऐसी भयानक यातनाओं को सहन करने के लिए योग्यता प्रदान करता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥