हम देख सकते हैं कि भिन्न प्रतिक्रियात्मक गतिविधियों के कारण, एक व्यक्ति का जन्म एक अमीर परिवार में होता है, और दूसरे का जन्म एक गरीब परिवार में होता है, हालांकि दोनों का जन्म एक ही स्थान, एक ही क्षण और एक ही वातावरण में होता है। जो अपने साथ पवित्र गतिविधि को ले जा रहा है, उसे एक अमीर या पवित्र परिवार में जन्म लेने का मौका दिया जाता है, और जो अधार्मिक गतिविधि को ले जा रहा है, उसे एक निम्न, गरीब परिवार में जन्म लेने का मौका दिया जाता है। शरीर के परिवर्तन का मतलब गतिविधियों के एक अलग क्षेत्र में बदलाव करना है। इसी तरह, जब लड़के का शरीर एक युवा के शरीर में बदल जाता है, तो लड़कपन की गतिविधियाँ युवा गतिविधियों में बदल जाती हैं।
यह स्पष्ट है कि जीव को एक विशिष्ट प्रकार की गतिविधि के लिए एक विशेष शरीर दिया जाता है। यह प्रक्रिया अनवरत रूप से चल रही है, एक ऐसे समय से जिसका पता लगाना असंभव है। इसलिए वैष्णव कवि कहते हैं, अनादि करमा-फले, जिसका अर्थ है कि किसी की गतिविधि की ये क्रियाएँ और प्रतिक्रियाएँ पता नहीं लगाई जा सकतीं, क्योंकि ये ब्रह्मा के जन्म के अंतिम सहस्राब्दी से अगले सहस्राब्दी तक भी जारी रह सकते हैं। हमने नारद मुनि के जीवन में उदाहरण देखा है। एक सहस्राब्दी में वह एक दासी का पुत्र था, और अगले सहस्राब्दी में वह एक महान ऋषि बन गया।
