आम तौर पर, लोग जीभ और जननांगों की संतुष्टि से संबंधित होते हैं। यही भौतिक जीवन है। भौतिक जीवन का अर्थ है खाना, पीना, मौज-मस्ती करना और आनंद लेना, अपनी आध्यात्मिक पहचान और आध्यात्मिक उन्नति की प्रक्रिया को समझने की कोई चिंता नहीं करना। चूंकि भौतिकवादी लोग जीभ, पेट और जननांग से संबंधित होते हैं, यदि कोई आध्यात्मिक जीवन में उन्नति करना चाहता है तो उसे ऐसे लोगों के साथ जुड़ने में बहुत सावधानी बरतनी चाहिए। ऐसे भौतिकवादी लोगों के साथ जुड़ना मनुष्य जीवन के रूप में जानबूझकर आत्महत्या करना है। इसलिए कहा जाता है कि एक बुद्धिमान व्यक्ति को ऐसे अवांछनीय संग से दूर रहना चाहिए और हमेशा संतों के साथ मिलना चाहिए। जब वह संतों के साथ जुड़ता है, तो जीवन के आध्यात्मिक विस्तार के बारे में उसके सभी संदेह दूर हो जाते हैं, और वह आध्यात्मिक समझ के मार्ग पर ठोस प्रगति करता है। यह भी कभी-कभी पाया जाता है कि लोग एक विशेष प्रकार के धार्मिक विश्वास के बहुत आदी हो जाते हैं। हिंदू, मुसलमान और ईसाई अपने विशेष प्रकार के धर्म में विश्वासी हैं, और वे चर्च, मंदिर या मस्जिद जाते हैं, लेकिन दुर्भाग्य से वे उन लोगों के साथ संबंध नहीं छोड़ सकते जो यौन जीवन और तालू की संतुष्टि के बहुत आदी हैं। यहाँ स्पष्ट रूप से कहा गया है कि व्यक्ति आधिकारिक तौर पर एक बहुत ही धार्मिक व्यक्ति हो सकता है, लेकिन यदि वह ऐसे लोगों के साथ जुड़ता है, तो निश्चित रूप से वह नरक के सबसे अंधकारमय क्षेत्र में गिर जाएगा।
