तेनावसृष्ट: सहसा कृत्वावाक्शिर आतुर: ।
विनिष्क्रामति कृच्छ्रेण निरुच्छ्वासो हतस्मृति: ॥ २३ ॥
अनुवाद
हवा के जोर से अचानक नीचे की तरफ धकेल दिए जाने के कारण, बच्चा बहुत ही मुश्किल से, उल्टा लटकता हुआ, सांस से वंचित और तेज दर्द के कारण स्मृति खो चुका होता है।
Suddenly pushed downwards by the air, the child comes out with great difficulty, head down, breathless and devoid of memory due to the intense pain.
तात्पर्य
कृच्छ्रेण, जिसका अर्थ है "बड़ी कठिनाई से"। जब बच्चा संकीर्ण मार्ग से पेट से बाहर आता है, तो दबाव के कारण वहाँ साँस लेने की प्रणाली पूरी तरह से बंद हो जाती है, और पीड़ा के कारण बच्चा अपनी याददाश्त खो देता है। कभी-कभी परेशानी इतनी गंभीर होती है कि बच्चा मृत या लगभग मृत अवस्था में बाहर आता है। कोई कल्पना कर सकता है कि जन्म के कष्ट क्या होते हैं। बच्चा उस भयानक स्थिति में पेट के अंदर दस महीने तक रहता है, और दस महीने के अंत में उसे जबरदस्ती बाहर निकाल दिया जाता है। भगवद-गीता में भगवान बताते हैं कि एक व्यक्ति जो आध्यात्मिक चेतना में उन्नति के बारे में गंभीर है, उसे हमेशा जन्म, मृत्यु, बीमारी और बुढ़ापे के चार कष्टों पर विचार करना चाहिए। भौतिकवादी कई तरह से उन्नति करता है, लेकिन वह भौतिक अस्तित्व में निहित दुख के इन चार सिद्धांतों को रोकने में असमर्थ होता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥