सन्दह्यमानसर्वाङ्ग एषामुद्वहनाधिना ।
करोत्यविरतं मूढो दुरितानि दुराशय: ॥ ७ ॥
अनुवाद
यद्यपि वह हमेशा चिंता की आग में जलता रहता है, फिर भी वह मूर्ख अपने तथाकथित परिवार और समाज का भरण-पोषण करने के लिए उन आशाओं को पूरा करने के लिए हर तरह के गलत काम करता रहता है जो कभी पूरी नहीं हो सकती हैं।
Though burning with worry, such a fool commits all kinds of evil acts for the sake of his never-ending hopes of supporting his so-called family and society.
तात्पर्य
ऐसा कहा जाता है कि अपने छोटे से परिवार का पालन-पोषण करने की अपेक्षा एक विशाल साम्राज्य का संचालन करना बहुत आसान है, खास तौर पर इन दिनों में जब कलियुग का प्रभाव इतना अधिक है कि माया के परिवार के मिथ्या निरूपण को स्वीकार करने के कारण हर कोई परेशान रहता है और चिंताओं से घिरा रहता है। जिस परिवार का पालन-पोषण हम कर रहे हैं वह माया द्वारा बनाया गया है; वह कृष्णलोक के परिवार का ही विकृत प्रतिबिंब है। कृष्णलोक में भी परिवार, मित्र, समाज, पिता और माता हैं; सब कुछ वहां मौजूद है, परंतु वे शाश्वत हैं। यहां हम शरीर बदलते हैं, इसी प्रकार हमारी पारिवारिक रिश्ते भी बदलते रहते हैं। कभी हम मनुष्यों के परिवार में होते हैं, कभी देवताओं के परिवार में, कभी बिल्लियों के परिवार में या फिर कभी कुत्तों के परिवार में। परिवार, समाज और मित्रता अस्थाई होती है, और इसलिए इन्हें असत कहा जाता है। ऐसा कहा जाता है कि जब तक हम इस असत, अस्थाई, अस्तित्वहीन समाज और परिवार से जुड़े रहते हैं, हम हमेशा चिंताओं से भरे रहते हैं। भौतिकवादी यह नहीं जानते हैं कि इस भौतिक संसार में परिवार, समाज और मित्रता केवल छलावा है, और इसलिए वे उनसे लगाव रखते हैं। स्वाभाविक रूप से उनका हृदय हमेशा जलता रहता है, परंतु सभी असुविधाओं के बाद भी वे ऐसे झूठे परिवारों का पालन-पोषण करने के लिए काम करते रहते हैं क्योंकि उन्हें कृष्ण के साथ वास्तविक पारिवारिक जुड़ाव की जानकारी नहीं होती।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥