पशु-जीवन के निम्नतम रूपों से क्रमशः गुजरते हुए और इस प्रकार अपने पापों को भोगते हुए, समस्त कष्टकर नारकीय परिस्थितियों से गुजरने के बाद, वह इस पृथ्वी पर मनुष्य के रूप में पुन: जन्म लेता है।
Having gone through all the painful hellish conditions and the lowest forms of animal life before he is born as a human being, and thus suffering his sins, he is reborn as a human being on this earth.
तात्पर्य
ठीक जैसे एक कैदी, जो परेशानी वाली जेल जीवन गुजार चुका है, फिर से आज़ाद हो जाता है, वैसे ही वह व्यक्ति जो हमेशा अपवित्र और दुष्ट कामों में लगा रहता है, उसे नारकीय परिस्थितियों में डाल दिया जाता है, और जब वह विभिन्न नारकीय जीवन जैसे कि निम्न श्रेणी के जानवरों जैसे कि बिल्लियाँ, कुत्ते और सूअर का जीवन गुजार लेता है, तो विकास की धीमी प्रक्रिया द्वारा वह फिर से एक मनुष्य के रूप में वापस आता है। भगवद्-गीता में कहा गया है कि भले ही योग प्रणाली के अभ्यास में लगा हुआ व्यक्ति पूरी तरह से खत्म न हो और किसी न किसी कारण से गिर जाए, फिर भी उसके अगले जन्म एक मनुष्य के रूप में तय हैं। यह कहा गया है कि ऐसा व्यक्ति, जो योग अभ्यास के मार्ग से गिर गया है, को उसके अगले जीवन में एक बहुत ही अमीर परिवार या एक बहुत ही पवित्र परिवार में जन्म लेने का मौका दिया जाता है। इसकी व्याख्या की जाती है कि "अमीर परिवार" का तात्पर्य एक बड़े व्यापारिक परिवार से है क्योंकि आम तौर पर जो लोग ट्रेड और व्यापारिक व्यवसाय में संलग्न होते हैं वे बहुत अमीर होते हैं। जो लोग आत्म-साक्षात्कार की प्रक्रिया में लगे हुए हैं, या परम निरपेक्ष सत्य से जुड़ते हैं, लेकिन जो कम पड़ जाते हैं, उन्हें ऐसे ही अमीर परिवार में, या पवित्र ब्राह्मणों के परिवार में जन्म लेने की अनुमति दी जाती है; किसी भी तरह, उसे अपने अगले जीवन में मानव समाज में प्रकट होने की गारंटी होती है। यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि यदि कोई नारकीय जीवन में प्रवेश नहीं करना चाहता है, जैसे तामिस्रा या अंध-तामिस्रा में, तो उसे कृष्ण चेतना की प्रक्रिया में प्रवेश करना होगा, जो प्रथम श्रेणी की योग प्रणाली है, क्योंकि यदि कोई इस जीवन में पूर्ण कृष्ण चेतना प्राप्त करने में असमर्थ है, तो उसे कम से कम अपने अगले जन्म में एक मानव परिवार में ले जाने की गारंटी है। उसे नारकीय स्थिति में नहीं भेजा जा सकता। कृष्ण चेतना सबसे शुद्ध जीवन है, और यह सभी मनुष्यों को कुत्तों या सूअरों के परिवार में जन्म लेने के लिए नरक में जाने से बचाता है।
इस प्रकार श्रीमद् भागवतम के स्कन्ध तीन के अंतर्गत तीसवाँ अध्याय समाप्त होता है ।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥