यास्तामिस्रान्धतामिस्रा रौरवाद्याश्च यातना: ।
भुङ्क्ते नरो वा नारी वा मिथ: सङ्गेन निर्मिता: ॥ २८ ॥
अनुवाद
जिन पुरुषों और महिलाओं का जीवन अवैध यौन संबंधों में बीतता है, उन्हें तामिस्र, अंध-तामिस्र और रौरव नामक नरकों में कई प्रकार के कष्ट दिए जाते हैं।
Men and women whose lives are spent in illicit sexual activities are given various kinds of tortures in the hells named Tamisra, Andhatamisra and Raurava.
तात्पर्य
भौतिक जीवन कामुक जीवन पर आधारित होता है। भौतिक लोगों का जीवन, जो अस्तित्व की तलाश की माँग से जूझ रहे होते हैं, कामवासना पर निर्भर है। इसलिए वैदिक सभ्यता में कामवासना केवल कुछ सीमाओं में अनुमति दी गई है: यह विवाहित जोड़ों और केवल संतान उत्पन्न करने के लिए है। पर जब कामवासना का प्रयोग अनधिकृत और अवैध तरीके से इन्द्रिय तृप्ति के लिए किया जाता है, तब स्त्री और पुरुष दोनों को इस दुनिया में या मृत्यु के बाद कठोर दंड का सामना करना पड़ता है। इस दुनिया में भी उन्हें उपदंश और सुजाक जैसे भयावह रोगों का दंड मिलता है, और अगले जीवन में, जैसा कि हम श्रीमद्-भागवतम् के इस संदर्भ में देखते हैं, उन्हें कई तरह की नारकीय परिस्थितियों में नरक दिए जाने के लिए भेजा जाता है। भगवद्-गीता, अध्याय एक में भी अवैध कामुक जीवन की निंदा की गई है और यह कहा गया है कि जो लोग अवैध कामुक जीवन से बच्चे पैदा करते हैं उन्हें नरक भेजा जाता है। भागवतम में भी इस बात की पुष्टि की गई है कि ऐसे अपराधियों को तामिस्र, अंध-तामिस्र और रौरव नामक नरकीय स्थितियों में रखा जाता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥