Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 3.30.26: नरक के कुत्तों और गिद्धों द्वारा उसकी अंतड़ियाँ खींच ली जाती हैं, यद्यपि वह जीवित रहकर इसे देख पाता है और उसे साँपों, बिच्छुओं, मच्छरों और अन्य जीवों से परेशान किया जाता है जो उसे काटते हैं। | bhagavat अध्याय 3.30: भगवान् कपिल द्वारा विपरीत कर्मों का वर्णन । bhagavat स्कन्ध 3: यथास्थिति । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जीवतश्चान्त्राभ्युद्धार: श्वगृध्रैर्यमसादने ।
सर्पवृश्चिकदंशाद्यैर्दशद्भिश्चात्मवैशसम् ॥ २६ ॥
अनुवाद
नरक के कुत्तों और गिद्धों द्वारा उसकी अंतड़ियाँ खींच ली जाती हैं, यद्यपि वह जीवित रहकर इसे देख पाता है और उसे साँपों, बिच्छुओं, मच्छरों और अन्य जीवों से परेशान किया जाता है जो उसे काटते हैं।
His eyes are gouged out while he is alive and in front of his eyes by the dogs and vultures of hell, and he is tormented by snakes, scorpions, biting creatures and other biting creatures.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥