योजनानां सहस्राणि नवतिं नव चाध्वन: ।
त्रिभिर्मुहूर्तैर्द्वाभ्यां वा नीत: प्राप्नोति यातना: ॥ २४ ॥
अनुवाद
इस तरह से उसे दो या तीन पलों में ९९ हज़ार योजन की दूरी पार करनी पड़ती है और उसके बाद तुरंत उसे भयंकर यातना दी जाती है, जिसे उसे सहना पड़ता है।
In this manner, he has to cover a distance of 99 thousand Yojanas in two or three moments and then immediately he is subjected to severe torture, which he has to endure.
तात्पर्य
एक योजन की गणना आठ मील की है, और उसे एक सड़क से गुजरना पड़ता है जो इसलिए 792,000 मील जितनी है। इतनी लंबी दूरी कुछ ही पलों में पार की जाती है। सूक्ष्म शरीर को कांस्टेबलों द्वारा ढका जाता है जिससे जीवित इकाई इतनी लंबी दूरी जल्दी से पार कर सकती है और उसी समय कष्ट सहन कर सकती है। यह आवरण, हालाँकि भौतिक है, इतने महीन तत्वों का है कि भौतिक वैज्ञानिक यह नहीं पता लगा सकते कि आवरण किससे बने हैं। आधुनिक अंतरिक्ष यात्रियों के लिए 792,000 मील कुछ ही पलों में तय करना अद्भुत लगता है। उन्होंने अब तक 18,000 मील प्रति घंटे की गति से यात्रा की है, लेकिन यहाँ हम देखते हैं कि एक अपराधी कुछ ही सेकंड में 792,000 मील की दूरी तय कर लेता है, हालाँकि यह प्रक्रिया आध्यात्मिक नहीं बल्कि भौतिक है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥