दंड प्रक्रिया को चैतन्य-चरितामृत में समझाया गया है। पहले राजा के आदमी किसी अपराधी को एक नाव में नदी के बीचों-बीच ले जाते थे। वे उसके बालों के एक गुच्छे को पकड़ कर उन्हें खींचते थे और उसको पूरी तरह से पानी में डुबो देते थे। और जब वह दम तोड़ने को होता तो राजा के नौकर उसे पानी से बाहर खींच लेते थोड़ी देर साँस लेने देते और फिर उसको दम घोंटने के लिए फिर से पानी में डुबो देते। इस तरह की सज़ा यमराज भूली हुई आत्मा को देते हैं, जैसा कि निम्नलिखित पद्यों में वर्णित किया जाएगा।
