Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 3.30.12: इस तरह दुर्भाग्यशाली व्यक्ति, अपने परिवार के सदस्यों का भरण-पोषण करने में असमर्थ होकर सभी सुंदरता से वंचित हो जाता है। वह हमेशा अपनी विफलता के बारे में सोचता रहता है, बहुत गहराई से दुखी होता है। | bhagavat अध्याय 3.30: भगवान् कपिल द्वारा विपरीत कर्मों का वर्णन । bhagavat स्कन्ध 3: यथास्थिति । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इस तरह दुर्भाग्यशाली व्यक्ति, अपने परिवार के सदस्यों का भरण-पोषण करने में असमर्थ होकर सभी सुंदरता से वंचित हो जाता है। वह हमेशा अपनी विफलता के बारे में सोचता रहता है, बहुत गहराई से दुखी होता है।
When that unfortunate person fails to provide for his family and is deprived of all beauty, he always thinks about his failure while sighing deeply.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥