Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 3.30.11: जब व्यापार में उसे असफलता मिलती है, तो वह बार-बार अपने आपको सुधारने का प्रयास करता है। लेकिन जब उसके सभी प्रयास असफल हो जाते हैं और वह बर्बाद हो जाता है, तो वह अधिक लालच में आकर दूसरों का धन स्वीकार कर लेता है। | bhagavat अध्याय 3.30: भगवान् कपिल द्वारा विपरीत कर्मों का वर्णन । bhagavat स्कन्ध 3: यथास्थिति । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जब व्यापार में उसे असफलता मिलती है, तो वह बार-बार अपने आपको सुधारने का प्रयास करता है। लेकिन जब उसके सभी प्रयास असफल हो जाते हैं और वह बर्बाद हो जाता है, तो वह अधिक लालच में आकर दूसरों का धन स्वीकार कर लेता है।
When he gets adverse results in his livelihood, he repeatedly tries to improve himself, but when all his efforts fail and he is ruined, then due to extreme greed he accepts the wealth of others.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥