चाणक्य नामक महान राजनीतिज्ञ-पंडित कहते हैं कि समय की एक क्षण भी वापस नहीं लाया जा सकता, भले ही कोई लाखों डालर देने को तैयार हो। बहुमूल्य समय को बर्बाद करने में होने वाले नुकसान की गणना नहीं की जा सकती। भौतिक या आध्यात्मिक रूप से, हर किसी को उस समय का उपयोग करने में सचेत रहना चाहिए जो उसके पास है। एक शर्तबद्ध आत्मा एक निश्चित समय के माप के लिए एक शरीर में रहती है, और यह शास्त्रों में अनुशंसा की जाती है कि उस छोटे समय के माप के भीतर ही कृष्ण चेतना को पूर्ण करना होता है और इस तरह समय के प्रभाव से मुक्ति मिलती है। परन्तु, दुर्भाग्य से, जो लोग कृष्ण चेतना में नहीं हैं, वे समय की प्रबल शक्ति द्वारा अपनी जानकारी के बिना बह जाते हैं, जैसे बादलों को हवा द्वारा उड़ाया जाता है।
