| श्रीमद् भागवतम » स्कन्ध 3: यथास्थिति » अध्याय 29: भगवान् कपिल द्वारा भक्ति की व्याख्या » श्लोक 9 |
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| | | | श्लोक 3.29.9  | विषयानभिसन्धाय यश ऐश्वर्यमेव वा ।
अर्चादावर्चयेद्यो मां पृथग्भाव: स राजस: ॥ ९ ॥ | | | | | | अनुवाद | | मंदिर में, पृथक्तावादी व्यक्ति द्वारा पदार्थ सुख, यश और ऐश्वर्य प्राप्त करने के उद्देश्य से की गई मूर्ति पूजा रजोगुणी भक्ति है। | | | | मंदिर में, पृथक्तावादी व्यक्ति द्वारा पदार्थ सुख, यश और ऐश्वर्य प्राप्त करने के उद्देश्य से की गई मूर्ति पूजा रजोगुणी भक्ति है। | | ✨ ai-generated | | |
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