|
| |
| |
श्लोक 3.29.6  |
मैत्रेय उवाच
इति मातुर्वच: श्लक्ष्णं प्रतिनन्द्य महामुनि: ।
आबभाषे कुरुश्रेष्ठ प्रीतस्तां करुणार्दित: ॥ ६ ॥ |
| |
| |
| अनुवाद |
| श्री मैत्रेय जी बोले: हे कुरुश्रेष्ठ, अपनी महिमामयी माता के शब्दों से अनुग्रहीत होकर तथा असीम दया से द्रवित होकर महामुनि कपिल निम्नलिखित कथन करते हैं। |
| |
| श्री मैत्रेय जी बोले: हे कुरुश्रेष्ठ, अपनी महिमामयी माता के शब्दों से अनुग्रहीत होकर तथा असीम दया से द्रवित होकर महामुनि कपिल निम्नलिखित कथन करते हैं। |
| ✨ ai-generated |
| |
|