| श्रीमद् भागवतम » स्कन्ध 3: यथास्थिति » अध्याय 29: भगवान् कपिल द्वारा भक्ति की व्याख्या » श्लोक 40 |
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| | | | श्लोक 3.29.40  | यद्भयाद्वाति वातोऽयं सूर्यस्तपति यद्भयात् ।
यद्भयाद्वर्षते देवो भगणो भाति यद्भयात् ॥ ४० ॥ | | | | | | अनुवाद | | ईश्वर के भय के कारण ही वायु चलती है, सूर्य चमकता है, वर्षा का देवता पानी बरसाता है और नक्षत्रों का समूह चमकता है। | | | | ईश्वर के भय के कारण ही वायु चलती है, सूर्य चमकता है, वर्षा का देवता पानी बरसाता है और नक्षत्रों का समूह चमकता है। | | ✨ ai-generated | | |
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