श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 29: भगवान् कपिल द्वारा भक्ति की व्याख्या  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  3.29.17 
महतां बहुमानेन दीनानामनुकम्पया ।
मैत्र्या चैवात्मतुल्येषु यमेन नियमेन च ॥ १७ ॥
 
 
अनुवाद
भक्त को चाहिए कि वह गुरु और आचार्यों को पूरा सम्मान देते हुए पूजा करे। उसे निर्धनों पर दया करनी चाहिए और अपने समान व्यक्तियों से मित्रता करनी चाहिए, लेकिन उसके सभी कार्य नियमपूर्वक और इंद्रियों पर संयम रखते हुए होने चाहिए।
 
भक्त को चाहिए कि वह गुरु और आचार्यों को पूरा सम्मान देते हुए पूजा करे। उसे निर्धनों पर दया करनी चाहिए और अपने समान व्यक्तियों से मित्रता करनी चाहिए, लेकिन उसके सभी कार्य नियमपूर्वक और इंद्रियों पर संयम रखते हुए होने चाहिए।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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