मन और आसनों को नियंत्रित करने के बाद, मनुष्य को चाहिए कि किसी सुनसान और पवित्र स्थान पर आसन बिछाए, उस पर शरीर को सीधा रखते हुए सुखपूर्वक बैठे और श्वास नियंत्रण (प्राणायाम) का अभ्यास करे।
After controlling the mind and postures, a person should spread his mat in a secluded and sacred place, sit comfortably on it keeping the body straight and practice breath control (Pranayama).
तात्पर्य
सुखासन में बैठना स्वाति समासिनः कहलाता है। योग-ग्रंथों में यही सिफारिश की गयी है कि व्यक्ति अपने पैरों के तलवों को दोनों जाँघों और टखनों के बीच रखकर सीधा बैठे; वह मुद्रा व्यक्ति को अपने चित्त को परम भगवान में केन्द्रित करने में सहायक होगी। यही प्रक्रिया भगवद्गीता के छठे अध्याय में भी सिफारिश की गई है। आगे यह सुझाव दिया गया है कि व्यक्ति एकांत और पवित्र स्थान पर बैठे। आसन में मृग-त्वचा और कुश-घास होनी चाहिए, जिस पर कपास की परत चढ़ाई हो।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥