यथोल्मुकाद्विस्फुलिङ्गाद्धूमाद्वापि स्वसम्भवात् ।
अप्यात्मत्वेनाभिमताद्यथाग्नि: पृथगुल्मुकात् ॥ ४० ॥
अनुवाद
प्रज्वलित अग्नि, ज्वाला से, चिनगारी से और धुएँ से अलग है, हालाँकि ये सभी इससे निकटता से जुड़े हुए हैं क्योंकि ये सभी एक ही प्रज्वलित लकड़ी से उत्पन्न होते हैं।
The burning fire is different from the flame, from the spark and from the smoke, though all of these are closely related to it, because they arise from the same burning wood.
तात्पर्य
हालाँकि प्रज्वलित लकड़ी, चिंगारियाँ, धुआँ और ज्वाला एक-दूसरे से अलग नहीं रह सकती, क्योंकि ये सभी आग के ही अंग हैं, फिर भी ये सभी एक-दूसरे से भिन्न हैं। अल्पबुद्धि व्यक्ति धुएँ को ही आग मान लेता है, हालाँकि आग और धुआँ एक दूसरे से बिल्कुल अलग हैं। आग की गर्मी और प्रकाश अलग हैं, हालाँकि आग को गर्मी और प्रकाश से अलग नहीं किया जा सकता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥