बाहूंश्च मन्दरगिरे: परिवर्तनेन
निर्णिक्तबाहुवलयानधिलोकपालान् ।
सञ्चिन्तयेद्दशशतारमसह्यतेज:
शङ्खं च तत्करसरोरुहराजहंसम् ॥ २७ ॥
अनुवाद
इसके पश्चात योगी ध्यान में भगवान की चार भुजाओं का चिन्तन करे जो प्रकृति की विभिन्न क्रियाओं का नियंत्रण करने वाले देवताओं की शक्तियों के स्रोत हैं। इसके बाद योगी केन्द्रित करे अपने मन को उन चमकते आभूषणों पर जो मन्दराचल के घुमने से चमक उठे थे। साथ ही उसे ठीक प्रकार से विचार करना चाहिए भगवान के चक्र (सुदर्शन चक्र) पर जो एक हजार अरों वाला हैं और असहनीय तेज वाले हैं और शंख ध्यान में लाए, जो उनकी कमल-सदृश हथेली में हंस के समान प्रतीत होते हैं।
After this, the Yogi should meditate on the four arms of the Lord which are the source of all the powers of the deities who control the various functions of nature. Then the Yogi should concentrate on the glittering ornaments which were rubbed by the rotation of Mount Mandara. He should also properly contemplate on the Lord's discus (Sudarshan Chakra) which has a thousand spokes and is of unbearable brilliance. He should also meditate on the conch which appears like a swan in His lotus-like palm.
तात्पर्य
कानून और व्यवस्था के सभी विभाग भगवान के शस्त्रों से उत्पन्न होते हैं। ब्रह्मांड में कानून और व्यवस्था का निर्देशन विभिन्न देवताओं द्वारा किया जाता है, और यहां कहा गया है कि यह भगवान के हाथों से निकलता है। मंदार पर्वत का यहाँ उल्लेख किया गया है क्योंकि जब राक्षसों द्वारा एक तरफ और देवताओं द्वारा दूसरी तरफ समुद्र का मंथन किया गया था, तब मंदार पर्वत को मथानी के रूप में लिया गया था। अपने कछुए अवतार में भगवान मथानी के लिए धुरी बन गए, और इस प्रकार मंदार पर्वत के घूमने से उनके आभूषण चमकदार हो गए। दूसरे शब्दों में, भगवान के हाथों पर आभूषण इतने शानदार और चमकदार हैं मानो उन्हें अभी हाल ही में पॉलिश किया गया हो। भगवान के हाथ में स्थित सुदर्शन चक्र नामक चक्र में एक हजार तीलियाँ हैं। योगी को प्रत्येक तिलियों पर ध्यान करने की सलाह दी जाती है। उन्हें भगवान के पारलौकिक रूप के प्रत्येक भाग पर ध्यान करना चाहिए।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥