भगवान के दिव्य रूप का वर्णन मंदिरों में मूर्ति, आर्क-विग्रह में बिल्कुल दर्शाया गया है। आम तौर पर, भगवान की मूर्ति के शरीर के निचले हिस्से को पीले रेशम से ढका जाता है। यह वैकुण्ठ पोशाक है, या वह पोशाक जो भगवान आध्यात्मिक आकाश में पहनते हैं। यह वस्त्र भगवान के टखनों तक फैला हुआ है। इस प्रकार, चूँकि योगी के पास ध्यान करने के लिए बहुत सारे दिव्य उद्देश्य हैं, इसलिए उनके लिए किसी काल्पनिक चीज़ पर ध्यान करने का कोई कारण नहीं है, जैसा कि उन तथाकथित योगियों का अभ्यास है जिनका उद्देश्य अवैयक्तिक है।
