योगी को अपने हृदय में ऐश्वर्य की देवी लक्ष्मीजी के कार्यों को स्थापित करना चाहिए। लक्ष्मीजी की पूजा सभी देवता करते हैं और वह सर्वोच्च व्यक्ति ब्रह्मा की माता हैं। उन्हें सदैव दिव्य भगवान् के चरणों और जाँघों की मालिश करते हुए देखा जा सकता है। इस प्रकार, वह सावधानी से उनकी सेवा करती हैं।
The yogi should fix his heart on the activities of the goddess of opulence, Lakṣmī, worshipped by all demigods and the mother of Brahma, the supreme being. She can always be seen kissing the feet and thighs of the divine Lord. Thus she serves Him with great care.
तात्पर्य
ब्रह्मा इस ब्रह्मांड के नियुक्त स्वामी हैं। क्योंकि उनके पिता गर्भोदकशाही विष्णु हैं, इसलिए भाग्य की देवी लक्ष्मी स्वतः उनकी माता हैं। लक्ष्मी जी की पूजा सभी देवताओं और अन्य ग्रहों के निवासियों द्वारा भी की जाती है। मनुष्य भी भाग्य की देवी से अनुग्रह प्राप्त करने के लिए उत्सुक रहते हैं। लक्ष्मी हमेशा परम पुरुषोत्तम भगवान नारायण के पैरों और जाँघों की मालिश करने में लगी रहती हैं, जो ब्रह्मांड के भीतर गर्भ के सागर पर लेटे हुए हैं। ब्रह्मा का वर्णन यहाँ भाग्य की देवी के पुत्र के रूप में किया गया है, लेकिन वास्तव में उनका जन्म उनके गर्भ से नहीं हुआ था। ब्रह्मा का जन्म स्वयं भगवान के उदर से होता है। गर्भोदकशाही विष्णु के उदर से एक कमल का फूल निकलता है, और वहीं ब्रह्मा का जन्म होता है। इसलिए भगवान की जाँघों की लक्ष्मी जी की मालिश को एक साधारण पत्नी के व्यवहार के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। भगवान साधारण पुरुष और महिला के व्यवहार से परे हैं। शब्द अभावस्य बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह इंगित करता है कि वह भाग्य की देवी की सहायता के बिना ब्रह्मा का उत्पादन कर सकते हैं। चूँकि पारलौकिक व्यवहार सांसारिक व्यवहार से भिन्न है, इसलिए यह नहीं माना जाना चाहिए कि भगवान अपनी पत्नी से सेवा उसी तरह प्राप्त करते हैं जैसे कोई देवता या मनुष्य अपनी पत्नी से सेवा प्राप्त कर सकता है। यहाँ यह सलाह दी जाती है कि योगी हमेशा इस चित्र को अपने हृदय में रखें। भक्त हमेशा लक्ष्मी और नारायण के बीच इस संबंध के बारे में सोचता है; इसलिए वह मानसिक स्तर पर वैसा ध्यान नहीं करता जैसा कि निःसारवादी और शून्यवादी करते हैं। भाव का अर्थ है "जो भौतिक शरीर को स्वीकार करता है", और अभाव का अर्थ है "जो भौतिक शरीर को स्वीकार नहीं करता है बल्कि मूल, आध्यात्मिक शरीर में अवतरित होता है"। भगवान नारायण किसी भी भौतिक वस्तु से पैदा नहीं हुए हैं। पदार्थ पदार्थ से उत्पन्न होता है, लेकिन वे पदार्थ से उत्पन्न नहीं हुए हैं। ब्रह्मा का जन्म सृष्टि के बाद होता है, लेकिन चूँकि भगवान सृष्टि से पहले मौजूद थे, इसलिए भगवान का कोई भौतिक शरीर नहीं है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥