यहाँ पर भगवान के नित्य-रूप का सारगर्भित वर्णन किया गया है। भगवान के पैरों के तलवों को विशिष्ट रेखाओं से विभूषित दिखाया गया है जो वज्र, ध्वज, कमल के पुष्प और अंकुश के सदृश हैं। उनके चमकीले और महत्वपूर्ण रूप से उभारित पैर के नाखूनों की कांति चंद्रमा की रोशनी की तरह जान पड़ती है। यदि कोई योगी भगवान के पैर के तलवों के निशानों पर और उनके नाखूनों की दिव्य कांति पर नजर डालता है, तो उसे भौतिक जगत में अज्ञान के अंधकार से मुक्ति मिल सकती है। यह मुक्ति मानसिक ऊहापोह से प्राप्त नहीं होती, बल्कि भगवान के कांतिमान चरण-नाखूनों से प्रस्फुटित होने वाले प्रकाश को देखने से प्राप्त होती है। दूसरे शब्दों में, यदि भौतिक जगत में अज्ञान के अंधकार से मुक्ति पाना चाहता है तो उसे पहले अपने चित्त को भगवान के चरण-कमलों में स्थिर रखना होगा।
