प्रभु की चेहरे की अभिव्यक्ति हमेशा यह संकेत देती है कि वह भक्तों को अनुकूलता और आशीर्वाद देने के लिए तैयार रहते हैं; हालाँकि, गैर भक्तों के लिए वह शांत रहते हैं। जैसा कि भगवद्-गीता में कहा गया है, यद्यपि वह सबके साथ समान रूप से व्यवहार करते हैं क्योंकि वह परम भगवान हैं और क्योंकि सभी जीव उनकी संतान हैं, वह भक्ति सेवा में लगे हुए लोगों के प्रति विशेष रूप से दयालु होते हैं। यही तथ्य यहाँ पर भी पुष्टि किया गया है: वह हमेशा भक्तों को अनुग्रह दिखाने के लिए उत्सुक रहते हैं। जिस प्रकार भक्त हमेशा परम भगवान की सेवा के लिए तत्पर रहते हैं, उसी प्रकार प्रभु भी विशुद्ध भक्तों को आशीर्वाद देने के लिए बहुत उत्सुक रहते हैं।
