हालाँकि भगवान का शाश्वत रूप में परम व्यक्तित्व भक्त के दिल के लिए इतना सुंदर और मनभावन है, लेकिन वह उन निजीकरणवादियों को आकर्षित नहीं करते हैं, जो उनके अवैयक्तिक पहलू पर ध्यान लगाना चाहते हैं। ऐसा अवैयक्तिक ध्यान मात्र निष्फल श्रम है। वास्तविक योगी, आधी बंद आँखों से, भगवान के परम व्यक्तित्व के रूप पर ध्यान केंद्रित करते हैं, न कि किसी भी शून्य या अवैयक्तिक पर।
