भगवान के व्यक्तित्व, कृष्ण, के रंग को यहाँ नील-उत्पल-दल के रूप में वर्णित किया गया है, जिसका अर्थ है कि यह नीले और सफेद रंग की पंखुड़ियों वाले कमल के फूल जैसा है। लोग हमेशा पूछते हैं कि कृष्ण नीले क्यों हैं। भगवान के रंग की कल्पना किसी कलाकार ने नहीं की है। इसका वर्णन प्रमाणिक शास्त्रों में किया गया है। ब्रह्म-संहिता में भी कृष्ण के शरीर के रंग की तुलना नीले बादल से की गई है। भगवान का रंग काव्य कल्पना नहीं है। भगवान के शरीर, उनके हथियार और अन्य सभी उपकरणों का ब्रह्म-संहिता, श्रीमद्-भागवतम, भगवद गीता और कई पुराणों में प्रामाणिक वर्णन दिया गया है। भगवान के स्वरूप को यहाँ पद्म-गर्भारुणेक्षणम के रूप में वर्णित किया गया है। उनकी आँखें कमल के फूल के अंदरूनी हिस्से से मिलती जुलती हैं, और अपने चार हाथों में वे चार प्रतीक रखते हैं: शंख, चक्र, गदा और कमल।
