भगवान् बोले : हे माँ, हे राजकन्ये, अब मैं तुम्हें योग विधि बताऊंगा जिसका लक्ष्य मन को केंद्रित करना है। इस विधि का अभ्यास करने से मनुष्य प्रसन्न रहकर परम सत्य के मार्ग की ओर आगे बढ़ता है।
The Lord said: O mother, O princess, now I will tell you the method of yoga whose aim is to concentrate the mind. By practising this method, a man remains happy and moves towards the path of the ultimate truth.
तात्पर्य
इस अध्याय में भगवान कपिलदेव द्वारा समझाए गये योग की प्रक्रिया स्वीकृत और मानक है, इसलिए इन निर्देशों का बहुत सावधानी से पालन किया जाना चाहिए। शुरू करने के लिए, भगवान कहते हैं कि योग अभ्यास से कोई परम सत्य, भगवान के सर्वोच्च व्यक्तित्व को समझने की दिशा में प्रगति कर सकता है। पिछले अध्याय में यह स्पष्ट रूप से बताया गया है कि योग का वांछित परिणाम कोई अद्भुत रहस्यमय शक्ति प्राप्त करना नहीं है। ऐसी रहस्यमय शक्ति से किसी को भी आकर्षित नहीं होना चाहिए, बल्कि भगवान के सर्वोच्च व्यक्तित्व को समझने के रास्ते पर प्रगतिशील एहसास प्राप्त करना चाहिए। भगवद-गीता में भी इसकी पुष्टि की गई है, जो छठे अध्याय के अंतिम श्लोक में कहती है कि महानतम योगी वह है जो अपने भीतर कृष्ण के बारे में लगातार सोचता है, या जो कृष्ण का भक्त है। यहां बताया गया है कि योग की प्रणाली का पालन करके कोई आनंदित हो सकता है। भगवान कपिल, जो भगवान के सर्वोच्च व्यक्तित्व हैं, जो योग पर सर्वोच्च अधिकार रखते हैं, यहां योग प्रणाली की व्याख्या करते हैं जिसे अष्टांग-योग के नाम से जाना जाता है, जिसमें आठ अलग-अलग अभ्यास शामिल हैं, अर्थात् यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि। अभ्यास के इन सभी चरणों से व्यक्ति को भगवान विष्णु का एहसास अवश्य होना चाहिए, जो सभी योगों का लक्ष्य है। तथाकथित योग अभ्यास हैं जिनमें कोई व्यक्ति अपने मन को शून्यता या अवैयक्तिक पर केंद्रित करता है, लेकिन कपिलदेव द्वारा बताई गई अधिकृत योग प्रणाली द्वारा इसे स्वीकार नहीं किया जाता है। यहां तक कि पतंजलि बताते हैं कि सभी योग का लक्ष्य विष्णु है। अष्टांग-योग इसलिए वैष्णव साधना का हिस्सा है क्योंकि इसका अंतिम लक्ष्य विष्णु की प्राप्ति है। योग में सफलता प्राप्त करना रहस्यमय शक्ति का अधिग्रहण नहीं है, जिसकी निंदा पिछले अध्याय में की गई है, बल्कि सभी भौतिक पदनामों और स्थिति से मुक्ति है, अपनी संवैधानिक स्थिति में है। वह योग अभ्यास में अंतिम उपलब्धि है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥