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श्लोक 3.27.26  |
एवं विदिततत्त्वस्य प्रकृतिर्मयि मानसम् ।
युञ्जतो नापकुरुत आत्मारामस्य कर्हिचित् ॥ २६ ॥ |
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| अनुवाद |
| प्रकृतिक गुणों का प्रभाव किसी प्रबुद्ध व्यक्ति को हानि नहीं पहुँचा सकता है, भले ही वह भौतिक कार्यों में लगा भी रहे क्योंकि उसे परमतत्त्व का ज्ञान है और उसका मन परमात्मा में ही लगा रहता है। |
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| प्रकृतिक गुणों का प्रभाव किसी प्रबुद्ध व्यक्ति को हानि नहीं पहुँचा सकता है, भले ही वह भौतिक कार्यों में लगा भी रहे क्योंकि उसे परमतत्त्व का ज्ञान है और उसका मन परमात्मा में ही लगा रहता है। |
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