श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 27: प्रकृति का ज्ञान  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  3.27.24 
भुक्तभोगा परित्यक्ता द‍ृष्टदोषा च नित्यश: ।
नेश्वरस्याशुभं धत्ते स्वे महिम्नि स्थितस्य च ॥ २४ ॥
 
 
अनुवाद
प्रकृति पर शासन करने की इच्छा के दोषों की खोज के बाद और फलस्वरूप उस इच्छा को त्याग कर, जीव स्वतंत्र हो जाता है और अपने स्वयं के वैभव में खड़ा हो जाता है।
 
प्रकृति पर शासन करने की इच्छा के दोषों की खोज के बाद और फलस्वरूप उस इच्छा को त्याग कर, जीव स्वतंत्र हो जाता है और अपने स्वयं के वैभव में खड़ा हो जाता है।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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