जब मनुष्य सोता है, तो उसकी सारी भौतिक सम्पत्ति जैसे प्राणशक्ति. ज्ञानेन्द्रियाँ, कर्मेन्द्रियाँ, मन और बुद्धि उसे जगा नहीं सकती हैं। वह तभी जाग सकता है जब परमात्मा उसकी सहायता करता है।
When a man is asleep, all his material wealth--viz. life force, sense organs, motor organs, mind and intellect--cannot arouse him. He can wake up only when God helps him.
तात्पर्य
सांख्य दर्शन का विस्तारपूर्वक वर्णन इस प्रकार किया गया है कि विराट्-पुरुष, जो परम भगवान का विराट रूप है, सभी प्रकार के संवेदी अंगों और उनके अधिष्ठाता देवताओं का मूल स्रोत है। विराट्-पुरुष और अधिष्ठाता देवताओं या जीवित संस्थाओं के बीच संबंध इतना जटिल है कि केवल संवेदी अंगों का उपयोग करने से, जो उनके अधिष्ठाता देवताओं से संबंधित हैं, विराट्-पुरुष को नहीं जगाया जा सकता है। केवल भौतिक गतिविधियों द्वारा विराट-पुरुष को जगाना या परम निरपेक्ष भगवान के साथ जुड़ना संभव नहीं है। केवल भक्ति भावना और अनासक्ति से ही कोई निरपेक्ष के साथ जुड़ने की प्रक्रिया को कर सकता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥