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bhagavat 3.26.69: ब्रह्मा भी बुद्धि सहित उसके हृदय में प्रवेश किए, परंतु तब भी विराट पुरुष ने उठने की मर्जी न की। देवताओं में श्रेष्ठ शंकर भी अहंकार के साथ उसके हृदय में प्रविष्ट हुए, किन्तु फिर भी वह नहीं डिगा।   |   bhagavat अध्याय 3.26: प्रकृति के मूलभूत सिद्धान्त   ।   bhagavat स्कन्ध 3: यथास्थिति   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 26: प्रकृति के मूलभूत सिद्धान्त  »  श्लोक 69
 
 
श्लोक  3.26.69 
बुद्ध्या ब्रह्मापि हृदयं नोदतिष्ठत्तदा विराट् ।
रुद्रोऽभिमत्या हृदयं नोदतिष्ठत्तदा विराट् ॥ ६९ ॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्मा भी बुद्धि सहित उसके हृदय में प्रवेश किए, परंतु तब भी विराट पुरुष ने उठने की मर्जी न की। देवताओं में श्रेष्ठ शंकर भी अहंकार के साथ उसके हृदय में प्रविष्ट हुए, किन्तु फिर भी वह नहीं डिगा।
 
Brahma also entered his heart with his intellect, but even then Virat-Purush did not agree to get up. Rudra also entered his heart with his ego, but even then he did not budge.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)