Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 3.26.68: सागर ने भूख और प्यास के साथ उसके पेट में प्रवेश किया, किन्तु फिर भी विशाल पुरुष ने उठने से इंकार कर दिया। चंद्रमा-देवता ने मन के साथ उसके हृदय में प्रवेश किया, किन्तु विशाल-पुरुष को जगाया न जा सका। | bhagavat अध्याय 3.26: प्रकृति के मूलभूत सिद्धान्त । bhagavat स्कन्ध 3: यथास्थिति । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सागर ने भूख और प्यास के साथ उसके पेट में प्रवेश किया, किन्तु फिर भी विशाल पुरुष ने उठने से इंकार कर दिया। चंद्रमा-देवता ने मन के साथ उसके हृदय में प्रवेश किया, किन्तु विशाल-पुरुष को जगाया न जा सका।
The ocean entered his stomach with hunger and thirst, but still the Virat Purush refused to get up. The moon god entered his heart with his mind, but the Virat Purush could not be awakened.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥