Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 3.26.63: अग्निदेव वाणी के मार्ग से उनके मुँह में चले गए पर विराट पुरुष नहीं उठे। तत्पश्चात् वायुदेव घ्राण इंद्रिय से उनके नाक में प्रवेश किए, तो भी विराट पुरुष जागृत नहीं हुए। | bhagavat अध्याय 3.26: प्रकृति के मूलभूत सिद्धान्त । bhagavat स्कन्ध 3: यथास्थिति । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अग्निदेव वाणी के मार्ग से उनके मुँह में चले गए पर विराट पुरुष नहीं उठे। तत्पश्चात् वायुदेव घ्राण इंद्रिय से उनके नाक में प्रवेश किए, तो भी विराट पुरुष जागृत नहीं हुए।
Agnidev entered his mouth through his genitals, but the great man did not wake up. Then Vayudev entered his nostrils through the sense of smell, yet the great man did not wake up.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥