जब देवता और विभिन्न इंद्रियों के अधिष्ठात्री देव प्रकट हो चुके, तो उन्होंने अपने-अपने उत्पत्ति स्थान को जगाना चाहा। किंतु ऐसा न कर पाने के कारण वे विराट पुरुष को जगाने के उद्देश्य से उनके शरीर में एक-एक करके पुनः प्रवेश कर गए।
In this way, when the gods and the presiding deities of the various senses had appeared, they all tried to awaken their respective places of origin. But as they were unable to do so, they re-entered the body of Virat-Purush one by one with the purpose of awakening him.
तात्पर्य
सोए हुए दिव्य नियंत्रक को जगाने के लिए, व्यक्ति को इंद्रियगम्य गतिविधियों को बाहर से भीतर की ओर मोड़ना होगा। आने वाले छंदों में, विराट-पुरुष को जगाने के लिए आवश्यक इंद्रियगम्य गतिविधियों को बहुत ही अच्छे ढंग से समझाया जाएगा।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥