सर्वोच्च भगवान पूर्णिमा के दिन गौर चंद्र या निर्मल पारलौकिक चंद्र के रूप में प्रकट हुए। भौतिक चंद्रमा पर धब्बे हैं, लेकिन पारलौकिक चंद्रमा पर, गौर चंद्र पर कोई धब्बे नहीं हैं। सर्वोच्च भगवान की सेवा में शुद्ध मन को स्थापित करने के लिए, गौरचंद्र निर्मल चंद्र की पूजा करनी होती है। जो लोग भौतिक रूप से भावुक हैं या जो जीवन में भौतिक उन्नति के लिए अपनी बुद्धि का प्रदर्शन करना चाहते हैं, वे सामान्य रूप से भगवान ब्रह्मा के उपासक होते हैं, और जो लोग शरीर के साथ पहचान करने की घोर अज्ञानता में हैं, वे भगवान शिव की पूजा करते हैं। हिरण्यकशिपु और रावण जैसे भौतिकवादी भगवान ब्रह्मा या भगवान शिव के उपासक हैं, लेकिन प्रह्लाद और कृष्ण चेतना की सेवा में अन्य भक्त भगवान, भगवान के व्यक्तित्व की पूजा करते हैं।
